Dongripali Gramin Bank Manager : शादी के बाद आना या दूसरे बैंक जाओ!’ मैनेजर सरोत्तम मालव की तानाशाही की इंतिहा
Baramkela News : सत्ता के गलियारों में बैठे अफसरों (Dongripali Gramin Bank Manager) और नेताओं को शायद अंदाजा भी नहीं है कि एक आम इंसान, एक गरीब किसान जब अपने हक के लिए किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटता है, तो उसके स्वाभिमान पर रोज कितने कोड़े बरसाए जाते हैं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड के अंतर्गत ग्रामीण बैंक शाखा डोंगरीपाली (Dongripali Gramin Bank Manager) में इन दिनों संवेदनशीलता का सरेआम कत्ल हो रहा है। यहां कुर्सी पर बैठे मैनेजर सरोत्तम मालव ने तानाशाही और अहंकार का जो नंगा नाच शुरू किया है, उसने मानवता को शर्मसार कर के रख दिया है।
तस्वीर की कल्पना कीजिए एक बेबस मां, जिसके चेहरे पर झुर्रियां और आंखों में बेइंतहा लाचारी है, वह अपने हाथों में अपनी लाडली बेटी की शादी का पीला कार्ड लेकर खड़ी है। वह कोई आलीशान बंगला या गाड़ी खरीदने के लिए कर्ज नहीं मांग रही। वह किसी बड़े व्यापार के लिए सब्सिडी नहीं ढूंढ रही।
वह अपनी आंखों में आंसू लिए, हाथ जोड़कर मैनेजर के सामने गिड़गिड़ाती है “साहब, बस KCC का लोन दे दो, मेरी बेटी का घर बस जाएगा। अगर समय पर पैसा नहीं मिला, तो समाज में नाक कट जाएगी। एक मां की इस चीख और दर्द को सुनकर शायद किसी पत्थर का दिल भी पिघल जाता, लेकिन डोंगरीपाली ग्रामीण बैंक के मैनेजर सरोत्तम मालव का दिल नहीं पसीजा।
आज, कल, परसो कहकर घुमाता रहा
पिछले कई महीनों से यह ‘साहब’ उस गरीब महिला को ‘कल आना, परसों आना, अगले हफ्ते आना’ कहकर दफ्तर के चक्कर लगवा रहे हैं। धूप में मीलों पैदल चलकर आने वाली इस मां को हर बार एक नई तारीख थमा दी जाती थी। लेकिन अब, जब शादी का समय बिल्कुल सिर पर आ गया है, तो इस साहब (Dongripali Gramin Bank Manager) ने संवेदनशीलता की सारी हदें और प्रशासनिक मर्यादा की हर सीमा पार कर दी। मैनेजर ने दो टूक शब्दों में अहंकार से चूर होकर कह दिया “मेरे पास तुम्हारी फाइल देखने का टाइम नहीं है। लोन चाहिए तो शादी के बाद आना, या फिर किसी दूसरे बैंक का रास्ता नापो।
गरीब के वजूद पर किया प्रहार Dongripali Gramin Bank Manager
यह बयान नहीं, बल्कि एक गरीब के वजूद पर किया गया करारा प्रहार है। सवाल यह उठता है कि जब बेटी की बारात 23 जून 2026 को दरवाजे पर आकर खड़ी होगी, जब टेंट वाले, कैटरिंग वाले, और कपड़े-गहने वाले पैसों के लिए घर पर तगादा करेंगे, तब क्या यह बेबस परिवार बैंक मैनेजर (Dongripali Gramin Bank Manager) का यह बयान उन्हें सौंपेगा? क्या लोन शादी बीत जाने और सब कुछ बर्बाद हो जाने के बाद दिया जाएगा? तब इस पैसे का क्या औचित्य रह जाएगा?
गरीब परिवार के अरमानों का गला घोंट रहा
एक गरीब किसान परिवार के अरमानों का, एक मासूम बेटी के सुनहरे भविष्य का इस तरह सरेआम गला घोटने का अधिकार इस बैंक मैनेजर को आखिर किसने दिया? क्या देश के नियम-कायदे सिर्फ बड़े उद्योगपतियों के करोड़ों-अरबों के लोन चंद मिनटों में पास करने के लिए बने हैं?
क्या इस व्यवस्था में एक गरीब मां के आंसुओं की कीमत शून्य है? डोंगरीपाली बैंक (Dongripali Gramin Bank Manager) के इस बंद केबिन के भीतर जो तानाशाही चल रही है, उसने यह साबित कर दिया है कि अफसरशाही आम जनता को कीड़ा-मकोड़ा समझती है। जिला प्रशासन और उच्च बैंकिंग अधिकारियों को इस तानाशाह मैनेजर की भाषा और रवैये पर तुरंत संज्ञान लेना होगा। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इस व्यवस्था से जनता का भरोसा हमेशा-हमेशा के लिए उठ जाएगा।
यह इस श्रृंखला का दूसरा एपिसोड है। अगले एपिसोड में हम कागजों का वो सच सामने लाएंगे, जो साबित करेगा कि महिला के सारे दस्तावेज सही होने के बावजूद मैनेजर किस ‘खोट’ की वजह से फाइल दबाए बैठा है। पढ़ते रहिए…