Dongripali Gramin Bank Corruption : सारे कागज पूरे, फिर भी ‘साहब’ की नीयत में खोट, फाइलों में दफन हुआ इंसाफ
Baramkela News : अमूमन बैंक (Dongripali Gramin Bank Corruption) अधिकारी किसी लोन को अटकाने के लिए यह बहाना बनाते हैं कि ‘कागज अधूरे हैं’ या ‘सिबिल स्कोर खराब है’। लेकिन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड के डोंगरीपाली ग्रामीण बैंक में जो खेल चल रहा है, वह नियम-कायदों का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर नीयत में खोट का मामला है।
ग्राम परसकोल की पीड़ित महिला सोनाफुल रावत के मामले में प्रशासनिक और कानूनी तौर पर कोई कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ और सिर्फ बैंक मैनेजर सरोत्तम मालव (Dongripali Gramin Bank Corruption) की संवेदनशीलता और उनकी नीयत में। यहां इंसाफ किसी तकनीकी खामी की वजह से नहीं, बल्कि एक तानाशाह अफसर की जिद की वजह से फाइलों के नीचे दम तोड़ रहा है।
हर जरुरी दस्तावेज फाइल में (Dongripali Gramin Bank Corruption)
सच्चाई को खंगालिए तो रूह कांप जाएगी। इस बेबस मां ने अपनी बेटी की शादी के लिए अपनी ही जमीन पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन के लिए आवेदन किया था। महिला के पास जमीन के सारे पुख्ता और वैध दस्तावेज मौजूद हैं। जमीन की ऋण पुस्तिका, खसरा, बी-1 की नकल और पहचान के लिए आधार कार्ड समेत हर एक जरूरी कागज बैंक में महीनों पहले जमा कराया जा चुका है। इतना ही नहीं, राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी के दस्तावेज भी फाइल में लगा दी है।
यहां मैनेजर की सनक चल रही Dongripali Gramin Bank Corruption
जब देश का कानून, सूबे का राजस्व विभाग और ज़मीन के सरकारी कागज़ात यह चीख-चीखकर कह रहे हैं कि महिला लोन पाने की हकदार है, तो फिर ग्रामीण बैंक मैनेजर सरोत्तम मालव (Dongripali Gramin Bank Corruption) को इसमें क्या खोट नजर आ रहा है? कानूनन जब सारे दस्तावेज दुरुस्त हों, तो लोन की राशि तय समय सीमा के भीतर हितग्राही के खाते में आ जानी चाहिए। लेकिन डोंगरीपाली बैंक में नियम नहीं, मैनेजर की सनक चलती है। हर बार जब यह गरीब मां आस लगाए बैंक के दरवाजे पर पहुंचती है, तो मैनेजर साहब फाइल को देखें बिना ही लोन रिजेक्ट कर देते हैं।
प्रताड़ित करने की सोची-समझी साजिश
यह जानबूझकर परेशान करने, थकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की सोची-समझी साजिश है। क्या बैंक मैनेजर (Dongripali Gramin Bank Corruption) खुद को देश के कानून और राजस्व विभाग से भी ऊपर समझते हैं? पटवारी की रिपोर्ट को दरकिनार करने का अधिकार उन्हें किसने दिया? असल में, यह पूरा मामला प्रशासनिक भ्रष्टाचार और उस ‘अदृश्य चढ़ावे’ की ओर इशारा करता है, जिसके बिना शायद डोंगरीपाली ग्रामीण बैंक में गरीबों की फाइलें आगे नहीं सरकतीं। एक गरीब, सीधी-सादी ग्रामीण महिला जो बैंक के पेचीदा नियमों को नहीं जानती, उसे कागज़ों के मायाजाल में इस तरह उलझा दिया गया है कि वह अपनी सुध-बुध खो बैठी है।
जनता के आक्रोश से पहले एक्शन लें कलेक्टर
23 जून 2026 को बेटी की बारात आनी है और आज 8 जून हो चुकी है। महज 15 दिनों का वक्त बचा है, लेकिन इंसाफ की फाइल पर इस तानाशाह मैनेजर (Dongripali Gramin Bank Corruption) के अहंकार का ताला लटका हुआ है। यह सिर्फ एक महिला के साथ धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर एक पूरे किसान परिवार को आत्महत्या और घोर मानसिक अवसाद की ओर धकेलने का अपराध है। अगर इस बदनीयती के खिलाफ जिला कलेक्टर और लीड बैंक ने तुरंत कड़ा एक्शन नहीं लिया, तो यह साहब इसी तरह कई और गरीबों के आशियाने और अरमानों को अपनी कुर्सी के नीचे कुचलते रहेंगे। वहीं जनता के आक्रोश का भी सामना करना पड़ सकता है।
यह इस श्रृंखला का तीसरा एपिसोड है। अगले एपिसोड में हम दिखाएंगे कैसे रसूखदारों का यहां काम आसानी से होता है। पढ़ते रहिए…