शिक्षा

Chhattisgarh School Timing Row  : आग उगलते सूरज के बीच सुबह 10 से दोपहर 4 बजे तक लग रहे स्कूल

CG School Timing Change News : छत्तीसगढ़ में इस समय आसमान (Chhattisgarh School Timing Row) से आग बरस रही है और सूरज की तपिश ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसी जानलेवा गर्मी और लू (हीटवेव) के बीच स्कूल शिक्षा विभाग का एक बेहद ही असंवेदनशील और हैरान करने वाला चेहरा सामने आया है। भीषण गर्मी के इस दौर में भी विभाग द्वारा स्कूलों का समय सुबह 10:00 बजे से लेकर दोपहर 4:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसके कारण मासूम बच्चों की सेहत पर भारी संकट मंडरा रहा है।

तपती सड़कों पर पैदल चलने को मजबूर मासूम

भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच सबसे बदतर और दयनीय हालत उन मासूम स्कूली (Chhattisgarh School Timing Row) बच्चों की है, जो ग्रामीण या बाहरी इलाकों से करीब 2-3 किलोमीटर का सफर पैदल या साइकिल से तय करके स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं। जब दोपहर 4:00 बजे स्कूलों की छुट्टी होती है, तब बाहर का तापमान अपने चरम पर होता है। उस वक्त खौलती और तपती हुई सड़कों से गुजरते हुए इन नौनिहालों को अपने घरों तक पहुंचना पड़ रहा है। गर्म हवाओं और चिलचिलाती धूप के सीधे संपर्क में आने से इन बच्चों के स्वास्थ्य पर ‘हीटस्ट्रोक’ (लू लगना), डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और तेज बुखार का खतरा लगातार मंडरा रहा है।

समय बदलने की उठ रही मांग Chhattisgarh School Timing Row

शिक्षा विभाग (Chhattisgarh School Timing Row) के इस अड़ियल और संवेदनहीन रवैये को लेकर प्रदेश भर के पालकों (अभिभावकों) और शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। पालकों का कहना है कि जब मौसम विभाग लगातार लोगों को दोपहर के समय बाहर न निकलने की एडवायजरी जारी कर रहा है, तब छोटे बच्चों को दोपहर की भीषण तपन में स्कूल में रोके रखना और फिर उसी आग उगलते मौसम में घर भेजना कहां का न्याय है? कई जिलों से बच्चों के बीमार होने की खबरें भी आने लगी हैं।

स्थानीय नागरिकों और जागरूक संगठनों ने सरकार तथा छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस अमानवीय समय सारणी में तत्काल बदलाव किया जाए। जनहित और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों का समय तुरंत बदलकर ‘सुबह कालीन’ (मार्निंग शिफ्ट) यानी सुबह 7:00 बजे से दोपहर 11:30 या 12:00 बजे तक करने की जरूरत है, ताकि बच्चों को इस जानलेवा गर्मी से बचाया जा सके।

 

 

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