कृषि

Chhattisgarh Grafted Brinjal  :  एमटेक पास इस किसान को 1 एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से हुआ 6.50 लाख का मुनाफा

CG Agriculture News : छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों में अब पारंपरिक फसलों (Chhattisgarh Grafted Brinjal) की जगह आधुनिक उद्यानिकी फसलों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। महासमुंद जिले के विकासखंड महासमुंद के अंतर्गत आने वाले ग्राम लोहारडीह से कृषि क्षेत्र में बदलाव की एक बेहद शानदार तस्वीर सामने आई है।

यहां के एक उच्च शिक्षित प्रगतिशील किसान क्रांति कुमार चंद्राकर ने पारंपरिक धान की खेती की पुरानी परिपाटी को छोड़कर ग्राफ्टेड बैंगन (कलमी भंटा) की आधुनिक खेती अपनाई है। इस तकनीकी खेती के दम पर उन्होंने न केवल अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा लिया है, बल्कि पूरे महासमुंद जिले के किसानों के लिए एक रोल माडल भी बन गए हैं।

एमटेक की डिग्री होने के बाद भी चुनी खेती

क्रांति कुमार चंद्राकर कोई साधारण किसान नहीं हैं, बल्कि वे एमटेक (M.Tech) तक शिक्षित हैं। उनके पास अपनी 1.46 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है, जहां वे पहले केवल पारंपरिक रूप से धान की फसल ही लिया करते थे।

धान की खेती (Chhattisgarh Grafted Brinjal) में पानी का बेतहाशा उपयोग होने, हर साल बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार में सीमित मुनाफे के कारण उन्हें जैसी उम्मीद थी, वैसी आर्थिक तरक्की नहीं मिल पा रही थी। इसी बात से परेशान होकर उन्होंने कुछ नया करने और उद्यानिकी फसलों की तरफ कदम बढ़ाने का कड़ा फैसला किया।

सरकारी योजना से मिला 30 हजार का अनुदान

उनकी इस सोच को सही दिशा साल 2025-26 में मिली, जब वे उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आए। विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित ग्राफ्टेड बैंगन और टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस योजना के जरिए उन्हें सरकार से सीधे उनके खाते में (DBT) 30 हजार रुपये की अनुदान सहायता राशि मिली।

इस शुरुआती आर्थिक और तकनीकी मदद के सहारे उन्होंने अपने खेत को आधुनिक तरीके से तैयार किया। उन्होंने खेत में पानी की बचत के लिए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) प्रणाली और खरपतवार से बचाव के लिए मल्चिंग पेपर तकनीक का उपयोग करते हुए ग्राफ्टेड बैंगन के पौधों का रोपण किया।

400 क्विंटल का रिकॉर्ड उत्पादन Chhattisgarh Grafted Brinjal

किसान क्रांति कुमार चंद्राकर ने बताया कि जहां पहले उन्हें धान की पारंपरिक खेती से पूरे सीजन में महज 35 हजार रुपये का बेहद सीमित लाभ हो पाता था, वहां अब ग्राफ्टेड बैंगन (Chhattisgarh Grafted Brinjal) की खेती ने उनके मुनाफे के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

इस आधुनिक तकनीक से उनके खेत में प्रति एकड़ लगभग 400 क्विंटल बैंगन का बंपर उत्पादन हुआ। बाजार में जब उन्होंने इस उच्च गुणवत्ता वाले बैंगन को बेचा, तो उन्हें औसतन 25 रुपये प्रति किलोग्राम का शानदार थोक भाव मिला। उन्होंने बताया कि बीज, मल्चिंग, खाद, कीटनाशक, श्रम और अन्य सभी कृषि इनपुट लागतों को पूरी तरह से काटने के बाद भी उन्हें प्रति एकड़ लगभग 6.50 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा (नेट प्रॉफिट) हासिल हुआ है।

जिले में फैल रही कृषि विविधीकरण की लहर

क्रांति कुमार चंद्राकर की इस बंपर सफलता को देखकर आसपास के गांवों के अन्य ग्रामीण किसान भी अब हैरान हैं। क्षेत्र के किसान अब उद्यानिकी फसलों, विशेष रूप से ग्राफ्टेड सब्जियों की उन्नत किस्मों, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी पानी बचाने वाली तकनीकों को सीखने और अपने खेतों (Chhattisgarh Grafted Brinjal) में लागू करने के लिए तेजी से आगे आ रहे हैं।

कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के जिला अधिकारियों के मुताबिक, सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस तरह के प्रदर्शन कार्यक्रमों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। इससे न केवल किसानों में तकनीकी जागरूकता बढ़ी है, बल्कि छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और कम पानी में ज्यादा मुनाफा देने वाला बिजनेस बनाने में सफलता मिल रही है।

 

 

 

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